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  • 72 सीटों वाली टूरिस्ट बस में 107 यात्री थे सवार, चालान होने से 15 घंटे तड़पे
  • सुबह से फंसे यात्रियों को शाम को दूसरी बस मिली लेकिन यह बस भी सबको नहीं बैठा सकी। जो बैठ सके वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए, बचे यात्री पूरे दिन भटकते रहे और खुद ही इधर-उधर साधन तलाशने की कोशिश करते रहे।
     
    अपने शहर की बसों के इंतजार में निजी स्टैंड पर खड़े यात्री और पर्यटक बसें।

    क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाकर दिल्ली से बिहार जा रही प्राइवेट टूरिस्ट बस को कानपुर के झकरकटी डिपो के पास शुक्रवार की भोर में एआरएम और एआरटीओ की टीम ने पकड़ लिया। जांच के बाद अफसरों ने बस का चालान कर दिया। इससे यात्रियों में हड़कंप मच गया और वे हंगामा करने लगे। यात्री वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग कर रहे थे। 

    घर पहुंचने की आस में दिल्ली से बस पर सवार लोगों को सुबह-सुबह इस मुसीबत में फंसना पड़ा। करीब 15 घंटों तक वे परेशान हुए। इस दौरान काफी संख्या में लोग भूखे-प्यासे ही दूसरी बस का इंतजार करते बैठे रहे। बिना रिजर्वेशन कराए ट्रेन यात्रा की अनुमति नहीं होने से यात्रियों के पास वहीं इंतजार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प भी नहीं था। हालांकि लोगों के विरोध करने पर बस ऑपरेटर ने उनके किराए वापस कर दिए।

    सुबह से फंसे यात्रियों को शाम को दूसरी बस मिली लेकिन यह बस भी सबको नहीं बैठा सकी। जो बैठ सके वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए, बचे यात्री पूरे दिन भटकते रहे और खुद ही इधर-उधर साधन तलाशने की कोशिश करते रहे।

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    इस बारे में कानपुर के एआरटीओ प्रवर्तन विनय पांडेय का कहना था कि बस की क्षमता सिर्फ 72 सीटों की थी, लेकिन बस में 107 लोग सवार थे। इसके अलावा ड्राइवर के पास डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) भी नहीं था। बस ऑपरेटर बस के पेपर भी नहीं दे सके। उन्होंने दावा किया कि सवारियों के लिए वैकल्पिक इंतजाम कर दिए गए थे।

    उधर, यात्रियों का आरोप था कि लंबी दूरी की रूटों पर सरकारी बसें पर्याप्त संख्या में नहीं चलती है। कोरोना की वजह से अधिकतर ट्रेनें बंद हैं। जो चल रही हैं, उनमें जनरल कोच नहीं है। सिर्फ रिजर्वेशन कराकर ही यात्रा की जा सकती है। ऐसे में उनके सामने प्राइवेट बसों का सहारा लेना ही एकमात्र रास्ता है। 


    Sat, Oct 31 2020

  • स्वामित्व विवाद में उलझे नगर निगम और केडीए, किराए की कीमती प्रापर्टी बनीं मुसीबत
  • जिन संपत्तियों को केडीए अपना बताकर नगर निगम से उसकी रिकवरी मांग रहा है, नगर निगम उन संपत्तियों पर केडीए के दावे को ही गलत बता रहा है। उसका कहना है कि वे संपत्ति पहले से ही नगर निगम के पास हैं, केडीए की स्थापना ही बहुत बाद में हुई है।
     
    कानपुर विकास प्राधिकरण {केडीए} और नगर निगम के बीच विवाद से आम लोगों की दिक्कतें बढ़ेंगी।

    (कानपुर) शहर में आवास देने और प्लाटिंग करने तथा शहर के विकास के लिए जिम्मेदार दो विभाग कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) और कानपुर नगर निगम के बीच किराए की कीमती संपत्तियों को लेकर ठन गई है। दोनों एक-दूसरे पर स्वामित्व विवाद का लेकर आरोप लगा रहे हैं।

    दरअसल शहर के अंदर ऐसी कई दुकानें, भवन, पार्क और कॉलोनी हैं, जो फिलहाल किराए पर आवंटित हैं। इनके स्वामित्व को लेकर केडीए और नगर निगम में तनातनी है। जिन संपत्तियों को केडीए अपना बताकर नगर निगम से उसकी रिकवरी मांग रहा है, नगर निगम उन संपत्तियों पर केडीए के दावे को ही गलत बता रहा है। नगर निगम का कहना है कि वे संपत्ति पहले से ही नगर निगम के पास हैं, केडीए की स्थापना ही बहुत बाद में हुई है।

    इस मामले में नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 126 (2) का उल्लेख करते हुए नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर मामले को अंतिम रूप से निस्तारित करने का अनुरोध किया है।

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    दूसरी तरफ कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने इन संपत्तियों पर अपना स्वामित्व जताते हुए आवंटियों और किराएदारों को विधिक नोटिस भेजा है। इन संपत्तियों में स्वरूपनगर मीट शाप, माडल टाउन, किदवई नगर पार्क ई-ब्लाक, घंटाघर, दुकान दाल मंडी, दुकान शास्त्री नगर, एमजी इंटर कालेज तिलक नगर, दुकान शहीद पार्क मुंशीपुरवा, स्वच्छकार कालोनी, बाबाकुटी, परमपुरवा, काकादेव, गोविंदनगर, मन्नूपुरवा, विरहाना रोड, फूलबाग, सी ब्लाक किदवई नगर, ब्वॉयज स्कूल गोविंदनगर, नवीन मार्केट भूमि खंड, व टीनशेड, खोया बाजार की दुकानें आदि शामिल हैं।

    केडीए कानपुर अर्बन डेवलपमेंट एक्ट 1973 की धारा 59(6) का उल्लेख करते हुए नगर निगम सीमा अंतर्गत स्थित संपत्तियों पर अपना स्वामित्व दर्शाते हुए वित्तीय वर्ष 2017-18 तक अवशेष धनराशि 32891684-00 रुपए की मांग की है। मामले में नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी का तर्क है कि नगर निगम पहले से है और केडीए बाद में बना है। ये संपत्ति नगर निगम के पास पहले से है।


    Sat, Oct 31 2020

  • 31 अक्टूबर: लखनऊ कानपुर आगरा वाराणसी मेरठ में आज वायु प्रदूषण एक्यूआई लेवल
  • यूपी की राजधानी लखनऊ समेत प्रमुख जिलों की हवा जहरीली हो गई है.
    यूपी की राजधानी लखनऊ समेत प्रमुख जिलों की हवा जहरीली हो गई है.

    लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ के साथ कानपुर, आगरा, वाराणसी और मेरठ में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) बहुत खराब हो गया है. इन शहरों की हवा जहरीली हो गई है. लखनऊ की एक्यूआइ आज दोपहर 1 बजे 164 है, जो कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. 

    शुक्रवार को एक्यूआइ 219 था. कल की अपेक्षा में आज के हवा की गुणवता बेहतर है लेकिन मानव स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है. क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी का कहना है कि लालबाग व हजरतगंज में चल रही खुदाई के कारण शहर में वायु की गुणवत्ता खराब हो रही है. 

    31/10/2020 03:05 PM IST

     

    आगरा में वायु प्रदुषण सबसे ज्यादा

     

    ताजनगरी में वायु की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब हो गई है. शहर के कई इलाकों में गैस चेम्बर जैसी स्थिति बन गई है. आज दोपहर 1 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स 212 दर्ज किया गया है, जो कि बतता है कि वायु गुणवत्ता की स्थिति बहुत खराब हो गई है. 

    31/10/2020 03:05 PM IST

     

    वाराणसी की हवा हुई जहरीली

     

    वाराणसी की आबोहवा जहरीली हो गई है. वाराणसी में आज दोपहर 1 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स 163 पाया गया है. पिछले 24 घंटे में औसतन वाराणसी की एयर क्वालिटी इंडेक्स 245 दर्ज किया गया था. 

    31/10/2020 03:05 PM IST

     

    कानपुर की वायु गुणवत्ता भी खराब

     

    जैसे- जैसे सर्दी का मौसम बढ़ रहा है वैसे-वैसै कानपुर में भी वायु की गुणवत्ता खराब होती जा रही है. कानपुर में पिछले 24 घंटे में एक्यूआइ 243 पाया गया है. आज दोपहर 1 बजे कानपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 143 पाया गया है. जिससे पता चलता है कि हवा दिन प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है. 

     

    अन्य खबरें

 
 
 

Sat, Oct 31 2020

  • पार्को में कंपोस्टिंग के लिए आईआईटी करेगी हेल्प
  • पार्को में कंपोस्टिंग के लिए आईआईटी करेगी हेल्प

    -फ‌र्स्ट फेज में नगर निगम के 5 बड़े पार्को में आईआईटी की मदद से शुरू होगी कंपोस्टिंग

    KANPUR: सिटी के बड़े पार्को में कंपोस्टिंग के लिए आईआईटी ने हाथ बढ़ाया है। रोजाना सैकड़ों किलो में निकलने वाले फूल, पत्ती और टहनियों के अवशेष नगर निगम के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं। यूं तो नगर निगम द्वारा सिटी के 105 पार्को में कंपोस्टिंग की जा रही है। लेकिन, अब आईआईटी के एक्सप‌र्ट्स जैविक खाद बनाने में मदद करेंगे। नगर आयुक्त के मुताबिक कारगिल पार्क, तुलसी उपवन और परशुराम वाटिका समेत अन्य पार्को में कंपोस्टिंग की जाएगी। नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी ने आईआईटी में घरेलू कचरे से जैविक खाद तैयार करने वाले एल्यूमिनाई हरी शंकर से बातचीत की, जिस पर पार्को में ही जैविक खाद बनाने का डिसिजन हुआ। यह खाद तैयार होने में 15 से 21 दिन लगते हैं। आईआईटी इस पर तेजी से काम कर रहा है।

     


    Thu, Oct 29 2020

  • युवाओं के मन को भा रहा डायमंड

  • Thu, Oct 29 2020

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